जल प्रबंधन

                                                                                               जल उपयोग

राज्य में अनियमित एवं अपर्याप्त वर्षा के कारण निरन्तर अकाल की स्थिति किसी न किसी क्षेत्र मे बनी रहती है तथा सिंचाई हेतु जल सीमित मात्रा मे उपलब्ध हो पाता है। राज्यश्मे निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या तथा औद्योगिकरण के कारण जल की माॅग बढ़ती जा रही है । ऐसी स्थिति मे इस बहुमूल्य संसाधन के संरक्षण, कुषल उपयोग कर अधिक क्षेत्र मे सिंचाई उपलब्ध कराना तथा प्रति इकाई जल से अधिक लाभ प्राप्त करना नितान्त आवष्यक है। अतः कृषकों का ध्यान इस सीमित एवं बहुमूल्य संसाधन के संरक्षण एवं कुषल उपयोग की ओर आकर्षित करने के लिये जल के समुचित उपयोग हेतु कृषि विभाग द्वारा निम्न कार्यक्रम क्रियान्वित कियेे जा रहे है:-(1) डिग्गी-फव्वारा कार्यक्रम

(2) फार्म पौण्ड (खेत तलाई) कार्यक्रम

(3) जल हौज कार्यक्रम

(4) सिंचाई पाईप लाइन कार्यक्रम

डिग्गी फव्वारा कार्यक्रम:-जल के समुचित उपयोग एवं सिंचित क्षेत्र में वृद्वि हेतु नहरी क्षेत्र में यह योजना काफी लाभदायक है । नहर चालू होने के समय उपलब्ध अतिरिक्त पानी को डिग्गी में एकत्रित कर फव्वारा और ड्रिप पद्वति द्वारा सिंचाई हेतु काम में लिया जा सकता है। यह कार्यक्रम राज्य के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, बीकानेर, कोटा, बारां एवं बूंदी जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है । कृषको द्वारा न्यूनतम चार लाख लीटर एवं इससे अधिक क्षमता की डिग्गी निर्माण पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय सतत कृषि मिषन (NMSA) के दिषा निर्देषों के अनुसार पक्की डिग्गी का निर्माण करने पर इकाई लागत का 50 प्रतिषत या राषि रुपयें 350/- प्रति घनमीटर भराव क्षमता तथा प्लास्टिक लाईनिंग (कच्ची) डिग्गी का निर्माण करने पर इकाई लागत का 50 प्रतिषत या राषि रुपयें 100/- प्रति घनमीटर भराव क्षमता अथवा अधिकतम रूपये 2.00 लाख, जो भी कम हो अनुदान देय है। इसके अतिरिक्त लागत का 25 प्रतिषत अतिरिक्त ज्वच.नच अनुदान राज्य मद से देय है। अर्थात् पक्की अथवा प्लास्टिक लाईनिंग (कच्ची) डिग्गी का निर्माण करने कुल अनुदान लागत का 75 प्रतिषत अथवा अधिकतम राषि रू. 3.00 लाख, जो भी कम देय है।

वर्ष 2019-20 में 125 डिग्गीयों का निर्माण करने पर कृषकों को 73.77 करोड़ रू. की अनुदान सहायता उपलब्ध करायी गयी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनान्तर्गत वर्ष 2020-21 में 930 डिग्गी निर्माण के भौतिक लक्ष्य एवं रूपये 27.90 करोड़ का वित्तीय प्रावधान रखा गया है।

फार्म पौण्ड (खेत तलाई) कार्यक्रम:   भारी मिट्टी व कठोर निचली सतह वाली भूमि में वर्षा जल को एकत्रित कर सिंचाई के काम में लेने हेतु यह कार्यक्रम काफी कारगर है। समस्त श्रेणी के कृषको द्वारा न्यूनतम 600 घनमीटर भराव क्षमता के फार्म पौण्ड निर्माण पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय सतत कृषि मिषन (NMSA) के दिषा निर्देषों के अनुसार सभी श्रेणी के कृषकों को कच्चे फार्म पौण्ड निर्माण पर लागत का 50 प्रतिशत (इकाई लागत रू. 87.50 प्रति घनमीटर भराव क्षमता) अथवा अधिकतम राषि रूपये 52,500/- जो भी कम हो, तथा प्लास्टिक लाइनिंग फार्म पौण्ड पर लागत का 50 प्रतिशत (इकाई लागत रू. 125 प्रति घनमीटर भराव क्षमता) अथवा अधिकतम राशि रु. 75000/- जो भी कम हो अनुदान देय है। इसके अतिरिक्त लागत का 10 प्रतिषत अतिरिक्त Top-up अनुदान राज्य योजना से देय है। अर्थात् कच्चे फार्म पौण्ड निर्माण पर कुल अनुदान लागत का 60 प्रतिषत  अथवा अधिकतम राषि रू. 63000/- जो भी कम हो, एवं प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड निर्माण पर कुल अनुदान लागत का 60 प्रतिषत अथवा अधिकतम राषि रू. 90000/- जो भी कम हो देय है।

राज्य में वर्ष 2019-20 में 3153 फार्म पौण्ड निर्माण करने पर कृषकों को 18.82 करोड़ रू. की अनुदान सहायता उपलब्ध करायी गयी है।  

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनान्तर्गत वर्ष 2020-21 में 12500 फार्म पौण्ड निर्माण के भौतिक लक्ष्य एवं रूपये 93.60 करोड़ का वित्तीय प्रावधान रखा गया है।

यह कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है । 

जल हौज कार्यक्रम:-सिंचाई जल का आवश्यकतानुसार उपयोग सुनिश्चिित करने हेतु जल हौज निर्माण एक महत्वपूर्ण योजना है। सभी श्रेणी के कृषको द्वारा जल हौज निर्माण पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय सतत कृषि मिषन (NMSA) के दिषा निर्देषों के अनुसार सभी श्रेणी के कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत या राषि रू. 350/- प्रति घन मीटर भराव क्षमता या अधिकतम रूपये 75000/- जो भी कम हो, अनुदान देय है। इसके अतिरिक्त लागत का 10 प्रतिषत अतिरिक्त Top-up अनुदान राज्य योजना से देय है। अर्थात् जल हौज निर्माण पर कुल अनुदान लागत का 60 प्रतिषत अथवा अधिकतम राषि रू. 90000/- जो भी कम हो, देय है।

वर्ष 2019-20 में 519 जल हौज निर्माण करने पर कृषकों को 9.89 करोड़ रू. की अनुदान सहायता उपलब्ध करायी गयी है। 

यह कार्यक्रम राज्य के जयपुर, अजमेर, दौसा, कोटा, सीकर, झुन्झुनू, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, जालौर, पाली, सिरोही, बूंदी, हनुमानगढ़ एवं राजसमन्द जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है। 

सिंचाई पाईप लाइन कार्यक्रम:-   सिंचाई हेतु उपलब्ध सीमित जल को कच्ची नालियों द्वारा खेत तक ले जाने से जल का 20 से 25 प्रतिषत अपव्यय होता है। इस अपव्यय को कम करने एवं जल बचत से अधिक क्षेत्र में सिंचाई करने हेतु सभी श्रेणी के कृषकों को सिंचाई पाईपलाइन पर स्त्रोत से खेत पर पानी ले जाने के लिये एचडीपीई/पीवीसी पाईप डालने पर समस्त श्रेणी के कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राषि रू. 50/- प्रति मीटर एचडीपीई पाईप पर या राषि रू. 35/- प्रति मीटर पीवीसी पाईप पर या राषि रू. 20/- प्रति मीटर लेफलेटेड लेमिनेटेड पाईप पर अथवा अधिकतम राशि रूपये 15000/- जो भी कम हो अनुदान सहायता देय है।वर्ष 2019-20 में 8793 कि.मी. पाईप लाईन पर कृषकों को 17.91 करोड रू. की अनुदान सहायता राषि उपलब्ध करायी जा चुकी है।

वर्ष 2020-21 में सिंचाई पाईपलाइन कार्यक्रम हेतु विभिन्न योजनान्तर्गत 5603 कि0मी0 के भौतिक लक्ष्य तथा 28.01 करोड रूपये का वित्तीय प्रावधान है।