राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

                                                                                                राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में (11वीं पंचवर्षीय योजना में)े 4 प्रतिषत वार्षिक वृद्धि दर अर्जित करने के उद्देष्य से भारत सरकार द्वारा एक विषेष अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता की नई योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2007-08 में लागू की गई थी। इस योजना में वर्ष 2007-08 से 2014-15 तक षत-प्रतिषत राषि केन्द्रीय सहायता के रूप में भारत सरकार से प्राप्त हो रही थी। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) में भी यह योजना भारत सरकार द्वारा जारी रखी गई, लेकिन वर्ष 2015-16 से केन्द्रियांश एवं राज्यांश 60ः40 प्रतिषत के रूप में कर दिया गया। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY-RAFTAAR) के नवीन ऑपरेशनल दिशा-निर्देश वर्ष 2017-18 से 2019-20 जारी किये गये।

उद्देष्य:-

  • फसल उत्पादन पूर्व तथा पष्चात कृषि अधिसंरचनात्मक विकास के माध्यम से कृषकों का सुदृढ़ीकरण।
  •  राज्यों को अपनी क्षेत्रीय आवष्यकता के अनुसार योजनाओं के निर्माण व क्रियान्वयन  की स्वायत्तता देना।
  • मूल्य संवर्धन युक्त उत्पादन मॉडल को बढ़ावा जिससे कृषक आय व उत्पादकता में वृद्धि।
  • कषकों को जोखिम सुरक्षा देने के लिये अतिरिक्त आय की गतिविधियां यथा एकीकृत कृषि, मषरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन आदि ।
  • राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप उपयोजनाओं का क्रियान्वयन - ए.एफ.डी.पी., पशु स्वास्थ्य उपयोजना आदि। 
  • कौषल विकास, नवाचार व कृषि उद्यमिता विकास से युवा सषक्तिकरण ।

भारत सरकार से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY-RAFTAAR) के नवीन दिशा-निर्देशों वर्ष 2017-18 से 2019-20 के अनुसार योजना के अन्तर्गत केन्द्रीय सहायता मुख्यतः निम्न श्रेणियों में उपलब्ध  है:- 

(अ). रेगुलर RKVY-RAFTAAR. 70% (कुल आवंटन का)

1. अवसंरचना एवं परिसम्पति - 50% (70% का)

i. प्री-हार्वेस्ट अवसंरचना - 20%  (70% का)

ii. पोस्ट-हार्वेस्ट अवसंरचना - 30%  (70% का)

2 PPPIAD परियोजनाएं - 30% (70% का)

3. फ्लैक्सी फण्ड - 20% (70% का)

(ब). RKVY-RAFTAAR-स्कीम . 20% (कुल आवंटन का)

(स). नवाचार . 10% कुल आवंटन का- (नवाचार 8% एवं प्रशासनिक व्यय 2% रखा गया है)।

राष्ट्रीय कृृषि विकास योजनान्तर्गत कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, डेयरी, वन विभाग, कृषि विपणन बोर्ड, कृृषि विष्वविद्यालयों, पशु विज्ञान व पशु चिकित्सा विष्वविद्यालय आदि को परियोजना आधारित सहायता प्रदान की जाती है।